आदिवासी-मुलवासियों के सामुदायिक अधीकार खत्म करने के लिए लाया गया है स्वामित्व योजना, मोदी सरकार के कार्यों को आगे बढ़ा रही है हेमंत सरकारः दयामणि बारला

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रिपोर्ट- संजय वर्मा…

रांचीः केंद्र की स्वामित्व योजना के तहत बनने वाली प्रॉपर्टी/संपति कार्ड नहीं चहिए, आदिवासी- मूलवासी किसानों के परंपरागत अधिकार सीएनटी/एसपीटी एक्ट, मुंडारी खूंटकटी अधिकार, 5वीं अनुसूचि के अधिकारों सहित 1932 के खतियान में प्रावधान अधिकारों का कड़ाई से पालन किया जाए। साथ ही 5वीं अनुसूची क्षेत्र  एवं सीएनटी एक्ट क्षेत्र के आदिवासी बहुल खूंटी जिला में ग्रामसभा को योजना की सही जानकारी दिए बिना, एवं ग्रामसभा की सहमति के बिना जबरन संपति कार्ड बनाने के लिए ग्रामीण क्षेत्र की जमीन का किया गया ड्रोन सर्वे रद्द किया जाए। इन मांगों को लेकर विधानसभा सत्र के दौरान कुटे मैदान में आदिवासी-मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच, मुंडारी खूंटकट्टी परिषद्, आदिवासी एकता मंच, संयुक्त पड़हा समिति और दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के ग्राम सभाओं द्वारा धरना-प्रदर्शन किया गया।

पांचवी अनुसूचित क्षेत्र में स्वामित्व योजना लागू करने से पहले ना ही टीएसी के समक्ष लाया गया ना ही विधानसभा में चर्चा की गईः

विरोध प्रदर्शन के दौरान दूर दराज के क्षेत्रों के पहुंचे ग्राम प्रधानों और आदिवासी प्रतिनिधियों ने केन्द्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकार पर भी आक्रोश निकालते हुए कहा, कि झारखंड के पांचवी अनुसूचि क्षेत्रों की केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा अनदेखी की जा रही है। स्वामित्व योजना झारखंड के पांचवी अनुसूचित क्षेत्रों में लागू करने से पहले ना ही इसे टीएसी के समक्ष रखा गया और ना ही विधानसभा में ही चर्चा की गई। इस योजना को सीधे-सीधे पांचवी अनुसूचित क्षेत्रों में उतार दिया गया है, जो संविधान का उल्लंघन है। केन्द्र और राज्य सरकार की कार्यशैली से पता चलता है कि, दोनों ही सरकारें पांचवी अनुसूचित क्षेत्र मानने से इन्कार कर रही है या फिर जानबुझ कर संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन कर रही है।

झारखंड विधानसभा, बजट सत्र के दौरान विधानसभा के समक्ष विरोध प्रदर्शन करते दयामणि बारला.

आदिवासी-मुलवासियों के सामुदायिक अधिकार को खत्म करने के लिए लाया गया है स्वामित्व योजनाः दयामणि बारला

कुटे मैदान में आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान झारखंड की आयरन लेडी सह आदिवासी अस्तित्व रक्षा मंच की दयामणि बारला ने आदिवासियों को संविधान द्वारा प्रदत संवैधानिक अधिकारों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि, आदिवासी समुदाय के जल-जंगल, जमीन, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक आधार को संरक्षित एवं विकसित करने के लिए भारतीय संविधान में विशेष कानूनी प्रावधान किए गए हैं। सीएनटी/एसपीटी एक्ट, पेशा कानून में विशेष प्रावधान है कि, गांव के सीमा के अंदर एवं बाहर जो प्राकृतिक संसाधन है, वो सभी गांव की समुदायिक संपत्ति है। इस पर क्षेत्र के ग्रामीणों का सामुदायिक अधिकार है। यह सभी अधिकार आदिवासी समुदाय को लंबे संघर्ष और शहादत के बाद मिला है। पेसा कानून, सीएनटी, एसपीटी एक्ट, फॉरेस्ट राइट एक्ट-2006 और 1932 के खतियान और विलेज नोट में दर्ज सामुदायिक अधिकार को बचाना जागरूक नागरिकों के साथ-साथ राज्य के कल्याणकारी सरकार की भी जिम्मेवारी है, लेकिन केन्द्र और राज्य सरकार संविधान प्रदत इन सामुदायिक अधिकारों को खत्म कर समुदाय की संपत्ति को पूंजिपतियों के हवाले करना चाहती है, लेकिन आदिवासी मुलवासी समुदाय, अपने इन अधिकारी को किसी भी हाल में छोड़ने के लिए तैयार नही है, चाहे इसके लिए एक बार फिर आदिवासी-मुलवासियों को अपने जान की कुर्बानी देनी पड़े।

आयरन लेडी, दयामणि बारला

पांचवी अनुसूचित क्षेत्रो में ग्रामसभाओं की आवाज अनसुनी कर रही है सरकारः

दयामणि बारला ने आगे बताया कि, वर्तमान में लाया गया स्वामित्व योजना के तहत प्रॉपर्टी कार्ड बनाने के लिए ग्राम सभा की सहमति के अधिकार को खारिज कर, जबरन ग्रामीण इलाके की जमीन का ड्रोन से सर्वे किया जा रहा है। सर्वे के विरोध में गांव-गांव में ग्रामीण बैठक कर ड्रोन सर्वे का विरोध कर रहे हैं। ग्रामसभा में विरोध का प्रस्ताव पारित कर विरोध का पत्र जिले के उपायुक्त, अंचलाधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी को भी दिया जा चुका है, लेकिन ग्राम सभाओं की आवाज को जिला प्रशासन अनसुनी कर रही है। सवाल उठाने वालों पर केस दर्ज कर जेल में डालने की धमकियां दी जा रही हैं।

बिनोद सिंह, विधायक, माले

कॉरपोरेट घरानों के इशारे पर सरकारें कर रही है काम, मनसुबे पर कामयाब नहीं होने दिया जाएगाः बिनोद सिंह

आंदोलन का समर्थन करते हुए विरोध-प्रदर्शन कार्यक्रम में पहुंचे माले विधायक विनोद सिंह ने कहा कि, केन्द्र सरकार की तरह हेमंत सरकार भी कॉर्पोरेट घरानों को लाभ पहुंचे की दिशा में काम कर रही है। झारखंड के सभी सामुदायिक अधीकार वाले जल-जंगल और जमीन को संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करते हुए समुदाय से लूट कर कॉर्पोरेट घरानों को देना चाहती है, इसलिए स्वामित्व योजना लाया गया है। इस योजना को लागू करने से पहले पांचवी अनुसूचित क्षेत्र के ग्रामसभाओं से प्रमिशन लेना चाहिए था, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया, जिससे पता चलता है कि सरकार संवैधानिक प्रावधानों के तहत चलना नहीं चाहती। अपने लाभ के लिए संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन कर हर कार्य करना चाहती है, लेकिन माले सरकार को ऐसा करने नहीं देगी। विनोद सिंह ने आदिवासी-मुलवासियों को आश्वासन दिया कि इस मामले को इसी बजट सत्र में विधानसभा के पटल पर उठाया जाएगा।  

पांचवी अनुसूचित क्षेत्रों से पहुंचे आदिवासी-मुलवासी.

हेमंत सरकार भी केन्द्र की मोदी सरकार के नक्शे कदम पर चल रही हैः अशोक वर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता

स्वामित्व प्रॉपर्टी कार्ड योजना के विरोध-प्रदर्शन कार्यक्रम में उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ता, अशोक वर्मा ने दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे हजारों ग्रामीण और उपस्थित दर्जनों ग्राम प्रधानों को संबोधित करते हुए कहा, कि, झारखंड की हेमंत सरकार को यहां की सत्ता पर जल-जंगल और जमीन के साथ सामुदायिक संपत्तियों की रक्षा के लिए सत्ता पर बैठाया गया है। पूर्व में रघुवर सरकार, कॉर्पोरेट घरानों को जमीन उपलब्ध कराने के लिए लैंड बैंक बना कर राज्य भर के सामुदायिक जमीन को समुदाय से लूट चुकी है और अब हेमंत सरकार भी रघुवर दास के काम को आगे बढ़ा रही है। अशोक वर्मा ने हेमंत सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि, अगर झारखंड के आदिवासी-मुलवासी आपको सत्ता में आसीन कर सकती है, तो सत्ता से उखाड़ कर फेंक भी सकती है। इस लिए समय रहते संवैधानिक प्रावधानों के तहत काम करें और आदिवासियों से उनका सामुदायिक अधीकार लूटने का काम बंद करें। रघुवर सरकार ने आदिवासी- मूलवासी समुदाय के परंपरागत समुदाय के संपत्ति को लूट कर लैंड बैंक बनाया था, और हेमंत सरकार वर्तमान में सिंगल विंडो सिस्टम के तहत उसी जमीन को ऑनलाइन धड़ल्ले से बेच रही है। ग्रामीण इलाकों में जमीन की ऑनलाइन खरीद-फरोख्त, जबरन गैरकानूनी रुप से कब्जा जैसी घटनाएं बढ़ी हैं, जो पांचवी अनुसूची, सीएनटी/एसपीटी एक्ट का खुल्लम खुला उल्लंघन है।

सभा के बाद राज्यपाल, मुख्यमंत्री, पंचायती राज मंत्री के नाम पर मांग पत्र भी सौंपा गया। मांग पत्र के माध्यम से निम्नलिखित मांग रखी गई हैः

  • 1. केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना को लागू नहीं किया जाए, जबरन ड्रोन से किए गए सर्वे को रद्द किया जाए।
  • 2. 1932 के खतियान में किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं हो, ये सुनिश्चित करे सरकार
  • 3. सीएनटी/एसपीटी एक्ट, मुंडारी खूंटकट्टी एवं पांचवी अनुसूची में प्रावधान कानून को कड़ाई से लागू किया जाए एवं आदिवासी मूलवासी समुदाय के समुदाय के अधिकारों को संरक्षित किया जाए।
  • 4. 1932 के खतियान में दर्ज गांव के सीमा के भीतर गैरमजरूआ आम, गैरमजरूआ खास जमीन, जंगल-झाड़ी जमीन, नदी-नाला, गिट्टी, बालू, सरना, मसना, खेल मैदान इत्यादि गांव की सामुदायिक संपत्ति है। इन सामुदायिक संपत्तियों को 2014 के बाद लैंड बैंक में शामिल किया गया है। इसे अविलंब रद्द किया जाए।
  • 5. क्षेत्र के सभी जल स्रोतों नदी-नाला, झील-झरना का पानी लिफ्ट इरिगेशन के द्वारा किसानों के खेतों तक पहुंचाया जाए।
  • 6. ऑनलाइन जमीन के दस्तावेजों में छेड़छाड़ हो रहा है साथ ही जमीन की हेरा फेरी हो रही है, इसे अविलंब बंद किया जाए।

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