मुरुमातु गांव में मुसहर(महादलित) समाज के साथ हुए घटना का सच…

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रिपोर्ट- संजय वर्मा…

रांचीः पलामू जिला, पांडू प्रखंड अंतर्गत मुरुमातु गांव का मामला तुल पकड़ता जा रहा है। बताया जा रहा है कि मुरुमातु के मुस्लिम समाज के लोगों ने मुरुमातु कर्बला के पास वर्षों से रह रहे 54 मुसहर समाज के लोगों को बोरिया बिस्तर समेट कर भगा दिया और इस दौरान उनके साथ मारपीट भी किया गया। वर्तमान में ये मामला राजनीतिक रंग ले चुका है। घटना की जानकारी मिलने के बाद कई राजनीतिक दल के लोग घटना स्थल पर पहुंच कर मुसहर समाज के लोगों से मुलाकात कर एक पक्ष का विरोध करते हुए सरकार को कोस रहे हैं।

इस घटना की जांच करने के लिए 3 सितंबर 2022 को एक जांच टीम मुरुमातु गांव पहुंची। जांच टीम में मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल झारखंड के महासचिव अरविन्द अविनाश, पीयूसीएल राज्य समिति से अधिवक्ता आशुतोष कुमार मधुकर, अधिवक्ता जयंत पाण्डेय, संगठन सचिव एस. एन. पाठक के अलावे गढ़वा व पलामू इकाई के सदस्य, ताजा खबर झारखंड से संजय वर्मा, सीपीआई(एम.एल) रेड स्टार के राज्य सचिव, वशिष्ठ तिवारी के अलावा और भी कई जनसंगठन के प्रतिनिधि शामिल थें। टीम का नेतृत्व पीयूसीएल झारखंड के राज्य महासचिव, अरविंद अविनाश कर रहे थें। जांच टीम ने मुरुमातु के मुस्लिम समाज और मुसहर(महादलित) समाज के लोगों के साथ-साथ पांडू थाना के थाना प्रभारी से बात कर पुरे घटना की सच्चाई जानने का प्रयास किया।

घटना स्थल पर जांच करते पीयूसीएल की टीम.

मुसहर समाज का दावा, कर्बला के पास स्थित जमीन में 179 साल से रह रहे हैः

मुरुमातु गांव पहुंचने पर पता चला कि, पांडू थाना प्रभारी सभी मुसहर(महादलित) समाज के लोगों को पुराने थाना भवन में रखे हुए हैं। उनके लिए थाना परिसर में ही अस्थाई निवास और खाने की व्यवस्था की गई है, जब तक की जिला प्रशासन द्वारा उनके लिए जमीन की व्यवस्था नही कर दी जाती। यहां मुसहर समाज का प्रतिनिधित्व कर रहे जितेन्द्र मुसहर ने बताया, कि हमारे पूर्वज इस जमीन में 179 साल से रहते चले आ रहे हैं, लेकिन जितेन्द्र मुसहर ने ये भी स्वीकार किया कि वह यहां पिछले चार साल से रह रहा है। कर्बला के पास स्थित जमीन में दो मिट्टी के मकान और तीन झोपड़ी में कूल 10 परिवार, जिसमें सदस्यों की कूल संख्या 54 है, वहीं रह रहे थें। जितेन्द्र मुसहर ने आगे बताया कि सोमवार का दिन था, उस दिन कुछ मुस्लिम समाज के लोग गांव में आएं और कहें कि तुमलोगों को आज कहीं नहीं जाना है। सभी के लिए खाने-पीने का व्यवस्था कर दिए हैं। थोड़ी देर बाद मुस्लिम समाज के लोगों ने कहा कि अपना-अपना बोरिया-बिस्तर समेट कर यहां से चले जाओ। जब हमलोग वहां से जाने के लिए इन्कार किएं तो हमलोगों को प्रति व्यक्ति 500 रुपया, चावल और नया झोपड़ी बनाने के लिए तिरपाल दिया। फिर भी नहीं मानें, तो हमलोगों के साथ मारपीट किया गया और कागज में ठेपा लगवाया गया, इसके बाद गांव से गाड़ी मंगवा कर हमलोगों को बोरिया-बिस्तर समेत लोटो के जंगल में ले जाकर छोड़ दिया।

जितेन्द्र मुसहर ने शिवलिंग, तुलसी का पौधा और बेलपत्र कुचलने की बात कही, लेकिन बुजूर्ग मुसहर ने इससे इन्कार कियाः

जितेन्द्र मुसहर ने आगे बताया कि, मुरुमातु गांव के मुस्लिम लोगों ने हमारे झोपड़ी के पास जो शिवलिंग स्थापित किया गया था उसे तोड़ दिया। इसके अलावे तुलसी का पौधा और बेलपत्र के पेड़ को भी काट दिया, लेकिन लेकिन महिलाओं व उपस्थित बूढ़े ने यह नहीं कहा।

मुसहरों के पास ना ही आधार कार्ड, ना ही वोटर कार्ड और ना ही राशन कार्ड हैः

जांच टीम ने मुसहरों से जब ये सवाल किया कि, सरकारी विकास योजनाओँ का लाभ मिल रहा है या नहीं? इस पर मुसहर समाज के लोगों ने बताया कि, हमलोगों के पास ना ही राशन कार्ड, ना ही वोटर कार्ड और ना ही आधार कार्ड है। हमलोगों को सरकार के किसी भी विकास योजना का लाभ नही मिलता है। हमलोग भीख मांग कर या मजदूरी करके अपने परिवार का जिविकोपार्जन करते हैं।

मुस्लिम समाज का दावा, पिछले दो साल से मदरसे की जमीन पर रह रहे हैं मुसहर समाज के लोगः

मुरुमातु गांव के मुस्लिम समाज, जिन पर मुसहरों के साथ मारपीट कर उन्हें गांव से भगाने का आरोप है, उनसे उनका पक्ष जाना। मुस्लिम समाज के लोगों ने बताया कि, जिस जमीन पर मुसहर समाज के 54 लोग वर्तमान में रह रहे हैं, वह 25 डिसमील का प्लॉट है, जो मदरसा मनजरे ईस्लाम के नाम से रजिस्ट्री है और उसका लगान रशीद भी कट रहा है। ये 25 डिसमील जमीन नबी हसन मियां ने मदरसे के नाम रजिस्ट्री किया है। दो साल पूर्व मुसहरों का चार परिवार उसी 25 डिसमील के प्लॉट, जिसका खाता न. 44 और खेसरा न. 437 हैं, पर झोपड़ी बना कर रहने लगे। जब मुस्लिम समाज द्वारा उनसे कहा गया कि ये मदरसा का जमीन है, यहां मदरसा बनाना है आप लोग चले जाएं। तब उन्होंने कहा कि लकड़ी काटने के लिए यहां आए हुए हैं, लकड़ी काट कर दो महीने बाद यहां से चले जाएंगे। लेकिन वे लोग बार-बार जाने के लिए कहने के बाद भी नही जा रहे थें, जिसके बाद समाज के लोगों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से थाने में मदरसे की जमीन खाली कराने के लिए आवेदन दिया। आवेदन का कॉपी, जमीन का लगान रसीद और 1987 में मदरसा के नाम किया गया रजिस्ट्री का पेपर भी मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा जांच टीम के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

वीडियो में मुसहर समाज के लोग मुस्लिम समाज से रुपये लेकर समझौता पेपर पर हस्ताक्षर करते हुए दिख रहे हैः

मुस्लिम समाज ने एक वीडियो भी जांच टीम के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसमें मुसहर समाज के लोग पांच सौ-पांच सौ रुपये के नोट लेते और समझौता पेपर पर ठेपा लगाते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। इस दौरान किसी भी तरह का कोई विवाद दोनों समाज के लोगों के बीच होता दिखाई नही पड़ रहा है।

मुसहरों के साथ मारपीट करने का आरोप झुठा, सभी को राजी खुशी के साथ रुपये देकर गांव से रवाना किया गयाः मुस्लिम समाज

मुस्लिम समाज ने बताया कि 29 अगस्त 2022 को मुसहरों के साथ गांव में बैठक रखा गया था, जिसमें दोनों पक्ष के बीच समझौता हुआ। समझौते के बाद उन्हें पुरे सम्मान के साथ रुपये, चावल और तिरपाल देकर वाहन में बैठा कर उनके कहे स्थान पर ले जाकर छोड़ा गया था। समझौता का पेपर भी दिखाया गया जिसमें निम्नलिखित शर्तें लिखी हुई थी।

1, मुसहर समाज के लोगों ने ये मांग किया कि, हमलोग दूसरे जगह जाने के लिए तैयार हैं और अपना मड़ई बनाने के लिए प्रति व्यक्ति 500 रुपये दे, ताकि हमलोग दूसरी जगह जा सकें। इस मांग को मुस्लिम समाज ने स्वीकार किया और प्रति व्यक्ति 500 रुपये का भुगतान किया।

2, मुसहर समाज ने बैठक में 100 किलोग्राम चावल का मांग किया, इसे भी मुस्लिम समाज ने स्वीकार कर लिया।

3, दोनों समाज के लोगों ने सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत किया। दोनों ओर से कोई अभद्र व्यवहार नहीं किया गया।

4, मुसहर समाज ने समझौते के बाद राजी खुशी से अपना समान बांध कर जाने लगें, उन्होंने जाने के लिए वाहन का मांग किया, जिसे मुस्लिम समाज ने मान लिया और जाने के लिए वाहन भी उपलब्ध करवाया।

5, मुसहर समाज के लोगों ने प्रति व्यक्ति 500 रुपये लेने के बाद समझौता पत्र पर अंगुठा भी लगाया है, जो समझौता पत्र पर स्पष्ट रुप से दिखाई पड़ रहा है। जिन्हें भी रुपया दिया गया उनके नाम के साथ उनके अंगुठे का निशान संलग्न है। इस समझौते के दौरान मुस्लिम समाज के जितने भी लोग मौजुद थें, उनका भी हस्ताक्षर पत्र में संलग्न है।

घटना से पूर्व थाना प्रभारी, पांडू ने दोनों पक्ष से जमीन का पेपर दिखाने के लिए कहा थाः

दोनों पक्ष से जानकारी लेने के बाद जांच टीम पांडू थाना पहुंची, जहां थाना प्रभारी पांडू, धुमा किस्कू ने बताया कि, मुस्लिम समाज द्वारा जमीन से कब्जा हटाने के लिए आवेदन दिया था। उस वक्त दोनों पक्ष से जमीन का पेपर मांगा गया था। मुसहर समाज द्वारा ये कहा गया कि सरकार ने हमारे पूर्वजों को जमीन का पेपर दिया था, जो हमलोगों के पास नही है, कहीं खो गया है। वहीं मुस्लिम समाज ने जमीन का रजिस्ट्री पेपर और लगान रशीद थाना में प्रस्तुत किया था। मदरसे के नाम से जमीन की रजिस्ट्री 1987 में हुआ था और उक्त जमीन का लगान रशीद भी कट रहा है और बकायदा रजिस्टर-टू में भी दर्ज है।

मुसहरों ने मुस्लिम समाज के लोगों पर मारपीट करने का आरोप लगा कर 12 लोगों के खिलाफ नामजद और कुछ अज्ञात पर मामला दर्ज करवाया हैः

थाना प्रभारी धुमा किस्कू ने आगे बताया कि मुसहर समाज के जितेन्द्र मुसहर ने थाना में 12 लोगों के खिलाफ नामजद और कुछ अज्ञात लोगों पर मारपीट करने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज करवाया है। हलांकि, जांच के दौरान ये पाया गया है कि 54 मुसहरों में से किसी के भी शरीर पर मारपीट का निशान नहीं है। चुंकि ये मामला दलित परिवारों का है, इसलिए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 12 में से 5 नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल उक्त जमीन पर धारा-144 लागू कर घेराबंदी करवाया जा रहा है, और शांति बहाली क लिए पुलिस फोर्स भी तैना किया गया है।

जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की विफलताः

मुसहर(महादलित) समुदाय को देश के नागरिक के तौर पर किसी भी सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलना सरकार की नाकामी दर्शाती है। इन्हें आधार कार्ड, वोटर कार्ड, पेंशन, शिक्षा व खाद्य सुरक्षा के तहत राशन से वंचित रखना सरकारी दावों पर गंभीर सवाल है। संवैधानिक मुल्य स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और न्याय की यहां धज्जियां उड़ती नजर आ रही है। भूमिहीन इस मुसहर(महादलित) समाज को आवास की सुविधा नहीं मिलना जिला प्रशासन के साथ ही स्थानीय जन प्रतिनिधियों की नियत व असफलता बयां करती है।

फिलहाल मामले को तुल देने के लिये मरुहातु पर्यटन स्थल बनता दिख रहा है, जबकि कल तक इनका कोई सुध लेने वाला कोई नहीं था।

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