करसो का पत्थर खदान, स्थानीय लोगों के लिए मौत का खदान हो रहा है साबित…

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रिपोर्ट- संजय वर्मा….

पलामूः कई घर और चारागाह के साथ-साथ खेतों में बरस रहे हैं बड़े-बड़े पत्थर, विस्फोट के कारन घरों में पड़ चुकी है दरार। पत्थर खदान के गहरे गड्डे में डुब कर एक बच्चे की हो चुकी है मौत। पत्थर खनन के दौरान हुए विस्फोट से पेड़ के तने टुट क गीर रहे हैं, पर्यावरण को पहुंच रहा है नुकशान। विस्फोट के दौरान लोग घरों में दुबक जाते हैं, लेकिन घर का छत फाड़ कर पत्थर घर में गीर रहा है, कई लोग बाल-बाल बच चुके हैं। खनन के कारन खदान के आसपास के कई कुवें और चापाकल सुख चुके है, लोगों को पानी के लिए लंबा सफल तय करना पड़ रहा है….ये पुरी की पुरी घटना है, पलामू जिले के मौजा करसो का, जहां मुख्य सड़क के किनारे ही खनन कंपनी, मेसर्स महाबीर (स्टोन माईन्स) द्वारा मिट्टी का पहाड़ खडा कर दिया गया है और इस मिट्टी के पहाड के बगल में ही स्थित है सोहराई महतो का मकान, जिसके उपर कभी भी ये मिट्टी का पहाड़ गीर सकता है। वर्तमान में पत्थर खनन के दौरान हो रहे विस्फोट की दलक से इनका मकान छत्तीग्रस्त हो चुका है।

पत्थर खदान  में विस्फोट से उड़ कर पत्थर मकान में गीरा, मकान छत्तीग्रस्त. 

खनन स्थल से मात्र 100 से 150 मीटर की दूरी पर स्थित है लेमोईया टोला, जिसमें कूल 12 घर हैं और इन घरों में कोरवा आदिवासियों के लगभग 60 लोग निवास कर रहे हैं। इनके घरों में विस्फोट के दौरान बड़े-बड़े पत्थर बरस चुके हैं, जिससे इनका मकान छत्तीग्रस्त हो चुका है। गनिमत ये रही कि ये पत्थर किसी इंसान के उपर नहीं गीरा। जब भी खनन कंपनी द्वारा पत्थर तोड़ने के लिए माईन्स में विस्फोट किया जाता है, ग्रामीणों में भय का माहौल कायम हो जाता है।

खनन के सभी नियम-कानूनों की उड़ाई जा रही है धज्जियांः

  • सड़क से माईनिंग स्थल की दूरी कम से कम 500 मीटर दूर होनी चाहिए, लेकिन यहां मुख्य सड़क के बगल में ही खनन हो रहा है। पत्थर खनन कंपनी द्वारा मुख्य सडक के किनारे ही मिट्टी का पहाड़ खड़ा कर दिया गया है।
  • माईनिंग स्थल से आबादी की दूरी कम से कम 500 मीटर होनी चाहिए, लेकिन जिस स्थल पर माईनिंग हो रही है, वहां वर्षों से सोहराई महतो का मकान है और मात्र 01 सौ से 150 मीटर की दूरी पर लेमोईया टोला हैं, जिसमें कोरवा समुदाय के लगभग 60 लोग निवास कर रहे हैं।
  • माईन्स एरिया में सुरक्षा की दृष्टिकोण से किसी प्रकार की घेराबंदी नही की गई है, जिसके कारन विस्फोट के दौरान बड़े-बड़े पत्थर उछल कर घर और पेड़ों पर गीर रहा है, जिससे इन्सानों के साथ-साथ पर्यावरण को भी भारी नुकशान पहुंच रहा है।
  • प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि, फर्जी ग्रामसभा कर पत्थर खनन का लीज कंपनी ने हांसिल किया है। खनन पट्टा रद्द करने की मांग को लेकर दो बार ग्रामसभा की बैठक में प्रस्ताव पारित कर जिले के उपायुक्त और खनन विभाग में आवेदन दिया गया है।
  • तात्कालीन मुखिया ने बताया कि मुझे अंधेरे में रख कर मुझसे हस्ताक्षर कंपनी ने करवाया है। बाद में मुझे जानकारी हुई की खनन पट्टा हांसिल करने के लिए मुझसे हस्ताक्षर करवाया गया था।
  • पत्थर खनन के बाद बने तालाबनुमा गड्डे में डुबने से एक बच्चे की मौत हो चुकी है। अगर खनन स्थल की घेराबंदी होती, तो बच्चे वहां नही जा पातें। मृतक बच्चे के अभिभावक बताते हैं कि, खनन कंपनी ने पुलिस से साठगांठ कर बच्चे की मौत की सन्हा में घटनास्थल में दूसरे जगह का नाम दर्ज करवाया हैं, जबकी गांव के सभी लोग इस बात के गवाह हैं कि, बच्चे की मौत पत्थर खदान के अंदर हुई है।

किसान के खेत में विस्फोट के बाद गीरा पत्थर.

मेसर्स महाबीर, करसो मौजा के 6.45 एकड़ जमीन पर कर रही है पत्थर खननः

मेसर्स महाबीर(स्टोन माईन्स) को पलामू जिला के करसो मौजा में खाता न. 12 के प्लोट न. 2044 पर खनन का लिज 6.45 एकड़ के लिए मिला है। खनन करने की अवधी 10 दिसंबर 2021 से 11 अक्टूबर 2029 तक है। पिछले 5 माह से मेसर्स महाबीर द्वारा यहां पत्थर खनन किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि, फर्जी ग्रामसभा का पेपर तैयार कर कंपनी ने खनन लिज हांसिल किया है। इसके विरोध में दो बार ग्रामीणों द्वारा ग्रामसभा में खनन लिज रद्द करने को लेकर ग्रामसभा की बैठक में प्रस्ताव पारित कर जिले के उपायुक्त और अंचलाधिकारी को सौंपा गया है, लेकिन अब तक किसी भी अधिकारी ने स्थल पर पहुंच कर ग्रामीणों को हो रहे नुकशान का जायजा नहीं लिया है। खनन कंपनी द्वारा खनन के लिए दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया रहा है, जिसका खामियाजा पत्थर खदान के आसपास बसे टोलों के ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।

पत्खर खदान के इसी गड्ढे में डुबने से बच्चे की हुई थी मौत.

मेसर्स महाबीर खनन कंपनी के पार्टनर मुरली साह का पक्षः

ग्रामीणों के आरोप और अब तक हुए नुकशान के बारे में खनन कंपनी के पार्टनर मुरली साह से बात किया गया। मुरली साह ने स्वीकार किया कि खनन के दौरान हुए विस्फोट से कुछ घरों को छत्ती पहुंची है। हुए छत्ति की भरपाई करने के लिए कंपनी तैयार है। खनन क्षेत्र में घेराबंदी करने का काम जल्द ही शुरु कर दिया जाएगा। पर्यावरण को हो रहे नुकशान के बाबत मुरली साह ने कहा कि, पहले की तुलना में अब पत्थर खनन के लिए कम पावर का विस्फोटक उपयोग में लाया जा रहा है, जिससे पत्थर अब खनन क्षेत्र से बाहर नहीं जाएगा। खड़क के किनारे जमा किए गए मिट्टी के पहाड़ के बारे में मुरली साह ने कहा कि पूर्व में मिट्टी जमा किया गया था, अब सड़क के किनारे मिट्टी डंप नहीं किया जा रहा है। वहीं मुरली साह ने कहा कि, कुछ लोग कंपनी से रुपये की मांग कर रहे हैं। नहीं दिए जाने पर मामले को हवा दे रहे हैं।

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