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रिपोर्ट- वसीम अकरम…

रांचीः स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के आवास के समक्ष 155 निजी सुरक्षाकर्मियों ने बुधवार को धरना दिया। इस दौरान मंत्री बन्ना गुप्ता ने सुरक्षाकर्मियों की एक भी बात नहीं सुनी, जिससे नाराज सुरक्षाकर्मियों ने स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता की गाड़ी को रोक दिया। सुरक्षा में तैनात जवानों के समझाने के बाद सुरक्षाकर्मियों ने मंत्री बन्ना गुप्ता को जाने दिया।

पार्टी में रहूं या ना रहूं गरीबों की हक की लड़ाई लड़ती रहूंगी-निशा भगत

इंटक महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष निशा भगत ने कहा कि हम लोग पिछले सरकार से लेकर वर्तमान सरकार तक वापस नौकरी  देने की गुहार लगा चुके हैं। सभी सुरक्षा कर्मी तीन माह से मांग कर रहे हैं, लेकिन सिर्फ इन्हें आश्वासन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री का कहना था कि पूर्व के स्वास्थ्य सचिव मेरी बातों को नहीं सुन रहे हैं, लेकिन अब स्वास्थ्य सचिव भी बदल गए हैं। हमारे सामने भी बात हुई, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री 155 सुरक्षाकर्मियों के जायज मांग पर विचार नहीं कर रहे हैं। कांग्रेस नेत्री निशा भगत ने कहा कि बतौर कांग्रेसी नेता में अपनी पार्टी के नेता और मंत्री से पूछना चाहती हूं कि जब हमने और जनता ने वोट दिया तब इन गरीबों को क्यों हटाया गया। उन्होंने कहा कि मैं पार्टी में रहूं या ना रहूं लेकिन गरीबों की आवाज उठाती रहूंगी।

अब तक तीन सुरक्षाकर्मी कर चुके हैं आत्मदाह, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री की नहीं नींद खुलीः

रांची जिला सुरक्षा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष मोबिन अंसारी ने कहा कि 155 सुरक्षाकर्मी मंत्री से आग्रह करने आए थे, लेकिन मंत्री के पास 1 मिनट का वक्त भी नहीं था कि वह हमारी समस्या को सुन सके।  उन्होंने कहा कि बेरोजगारी के कारण तीन लोगों ने आत्महत्या लिया। पूर्व में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि आपके मांगों पर विचार करते हुए पुनः बहाल किया जाएगा, लेकिन आज तो हमारी बातों को भी नहीं सुना है। सुरक्षाकर्मियों के छोटे-छोटे बच्चे हैं जो भूखे रहने को मजबूर हैं। यदि हमें बहाल नहीं किया जाता है तो भूख हड़ताल करेंगे।

सुरक्षा कर्मियों की मांगों पर किया जाएगा विचार-बन्ना गुप्ता

वहीं झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि सुरक्षा कर्मियों की मांगों पर विचार किया जाएगा। बताते चलें कि, राजधानी रांची के सदर अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी में कार्यरत इन 155 सुरक्षाकर्मियों को पिछले 1 मार्च 2019 को काम से हटा दिया गया था। सभी सुरक्षाकर्मी प्राइवेट एजेंसी के माध्यम से मामूली मानदेय 3500 रुपए से 6400 रुपए में अपनी सेवा दे रहे थे। तत्कालीन सरकार ने इन्हें हटाकर होमगार्ड के जवानों को ड्यूटी पर लगा दिया है। पूर्ववर्ती सरकार के मुख्यमंत्री रघुवर दास और स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी से कई बार गुहार लगाने के बावजूद भी सुरक्षाकर्मियों को वापस नौकरी नहीं मिली। गठबंधन की सरकार बनने के बाद सुरक्षा कर्मचारी संघ के सदस्यों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता से भी वापस नौकरी देने की गुहार लगा चुके हैं, बावजूद इसके अब तक इन्हें बहाल नहीं किया गया।

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