नामकुम प्रखंड़, राजाउलातु पंचायत के ग्रामीण पत्थर खदान संचालकों से परेशान…

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रिपोर्ट- संजय वर्मा…

रांचीः झारखंड प्रदेश की नियति कहें या बदनसीबी, इस प्रदेश में भरपुर वन और खनीज संपदा होने के बावजुद य़हां के लोग वर्तमान में भी धुल फांकने के लिए मजबुर हैं। झारखंड़ अलग राज्य बनाने का मक्सद प्रदेश और प्रदेश में रहने वाले स्थानीय लोगों का विकास रहा था। अलग राज्य बनने से पूर्व कहा जाता था, कि झारखंड अलग राज्य बन जाने से यहां के खनीज संपदा की बिक्री से मिलने वाले पैसे से लोगों का विकास होगा, यहां के लोगों को सरकारी नौकरी में प्राथमिकता मिलेगी, जिससे ये क्षेत्र खुशहाल होगा, यहां विकास की ब्यार बहेगी। लेकिन अलग राज्य बनने के 25 साल बाद भी यहां के स्थानीय लोग आंसू बहाने और घुंट – घुंट कर मरने के लिए मजबुर हैं। झारखंड के लोग रोजगार की तलाश में दुसरे प्रदेशों में पलायन कर रहे हैं। शिक्षा स्वास्थ्य़ और रोजगार की सुविधा से यहां के लोग वंचित हैं। राज्य में खनीज संपदा का जम कर दोहण हो रहा है। इस कार्य में सरकारी से लेकर प्राईवेट कंपनिया लगी हुई है। बावजुद यहां दूर – दूर तक अलग राज्य बनाने का वो मक्सद पुरा होगा हुआ दिखाई नहीं पड़ रहा है।
राजाउलातु पंचायत के पत्थर खदान संचालकों पर प्रदुषण विभाग का नियंत्रण नहींः
वर्तमान में हम बात करते हैं झारखंड की राजधानी रांची जिले के नामकुम प्रखंड का। नामकुम प्रखंड के राजाउलातु पंचायत में कई कंपनियां पत्थर खनन का कार्य कर रही है। पत्थर खनन से कंपनियों और राज्य सरकार को मुनाफा हो रहा है, लेकिन इस पंचायत के अंतर्गत आने वाले सभी गांव के ग्रामीणों पर इसका हानिकारक प्रभाव पड़ा है, जो वर्तमान में भी जारी है। ग्रामीणों की प्रतिवर्ष आय कम हो गई है। खदानों से होने वाले प्रदुषण के कारण ग्रामीण के स्वास्थ्य में गिरावट आ रही है। कई ग्रामीण काल के गाल में भी समा चुके हैं।
प्रदुषण के कारन लाह उत्पादन में आई कमीः
स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि इस पंचायत में हजारों की संख्या में कुसुम के पेड़ हैं, जिस पर हमलोग लाह का उत्पादन कर प्रति वर्ष एक पेड़ से सत्तर हजार से लेकर एक लाख रुपये की कमाई किया करते थें, लेकिन जब से हमारे पंचायत में कंपनियां पत्थर का उत्खनन कर रही है, तब से लाह के उत्पादन में कमी आई है। कई कुसुम के पेड़ कंपनी के लोगों ने ही काट कर फेंक दिया है। लाह एक नगदी फसल है, इसे बेच कर हमलोग अपनी आर्थिक स्थिति मजबुत करते हुई बिना सरकारी सहायता के कृषि कार्य किया करते थें, जो वर्तमान में बंद हो चुका है। वहीं प्रदुषण से हमारे स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ा है। खेतों में धुल कण जमा हो जाने से हरी सब्जियों का उत्पादन यहां के किसान नहीं कर पा रहे हैं।
ग्रामीणों के घर और खेतों में धुलकण का जमावः
ग्रामीण बताते हैं कि हमारे ग्रामीण सड़क पर विभिन्न कंपनियों की हाईवा, पत्थर ढुलाई का कार्य कर रही हैं। प्रतिदिन एक सौ से लेकर एक सौ पच्चास हाईवा हमारे ग्रामीण सड़क पर चल रही है, जिसके कारन सड़कों की स्थिति बद से बदत्तर होते जा रही है और घरों, खेतों में धुलकण जम जा रही है। कंपनी ने खनन करने से पूर्व प्रतिदिन सुबह और शायं के समय सड़कों पर टैंकर से जल छिड़काव कर प्रदुषण रोकने की बात कही थी, लेकिन वर्तमान में जल का छिड़काव नहीं किया जा रहा है। प्रदुषण के कारन ग्रामीणों के रोजगार बंद हो रहे हैं, घरों को नुकशान पहुंच रहा है। राजाउलातु पंचायत में ही राशन की दुकान और होटल का संचालन करने वाले रमेश कच्छप की पत्नी प्रतिमा उरांव बताती है, कि हमलोग होटल और राशन दुकान का संचालन कर अपने परिवार का जिविकोपार्जन करते हैं। हमारे दुकान के सामने से प्रतिदिन सैंकडों की संख्या में बाईवा वाहनों का परिचालन जारी रहता है। हाईवा से गिरने वाले पत्थर और उड़ रहे धुलकण से होटल और राशन दुकान का सामान बर्बाद हो जा रहा है। हमारे होटल में धुलकण का जमाव होने के कारन ग्राहक भी नहीं आ रहे हैं। मैं प्रतिदिन सुबह शायं सड़क पर पानी का छिड़काव करती हूं, ताकि छुलकण कम उड़े और नुकशान ज्यादा ना हो। जबकि खनन के पूर्व कंपनी वालों ने प्रतिदिन सुबह और शायं में टैंकर से पानी छिड़काव करने की बात कही थी। प्रदुषण विभाग कान में तेल डाल कर सोई हुई है। हमलोगों का विकास तो नहीं, लेकिन विनाश जरुर हो रहा है।
प्रदुषण नियंत्रण करे खदान संचालक, अन्यथा सभी खदानों में काम बंद करवाया जाएगाः ग्रामाीण
स्थानीय लोगों ने प्रदुषण विभाग और खनन कंपनियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि प्रदुषण विभाग सिर्फ अवैध उगाही पर ध्यान ना दे और खनन कंपनियां स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और जीने के साधनों को सुरक्षित रखने में हमारी मदद करे, अन्यथा पुरे ईलाके में ग्रामसभा कर खनन कार्य बंद करवा दिया जाएगा।
वीडियो रिपोर्ट…..

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