संपत्ति/प्रोपर्टी कार्ड नहीं चाहिए, आदिवासी-मुलवासियों की जमीन लूट के लिए लाया गया है संपत्ति/ प्रोपर्टी कार्डः दयामणि बारला

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रिपोर्ट- संजय वर्मा…

खुंटीः आदिवासी-मुलवासियों की जमीन एक बार फिर लूटने की तैयारी हो चुकी है। सरकार पांचवी अनुसूची क्षेत्र में बाहरी लोगों को बसाने के लिए ये पुरा खेल, खेल रही है। पूर्व की रघुवर सरकार ने बिना ग्राम सभा की सहमति लिए लाखों एकड़ जमीन लैंड बैंक बना कर आदिवासी- मुलवासियों की जमीन हड़प ली है और अब हेमंत सोरेन की सरकार उसी जमीन को संपत्ति/प्रोपर्टी कार्ड बना कर पुरी तरह पूंजीपतियों को सौंपने की तैयारी में है। ये कहना है झारखंड की आयरन लेडी दयामणि बारला का।

मंगलवार को खुंटी जिला उपायुक्त कार्यालय के समीप “जदूर अखड़ा मैदान” में आदिवासी-मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच, मुंडारी खूंटकटी परिषद् और आदिवासी एकता मंच के संयुक्त तत्वाधान में एक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 5 हजार की संख्या में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आदिवासी-मूलवासी जनता शामिल हुएं इसके अलावा दो दर्जन से भी अधीक ग्रामप्रधानों ने भी मंच साझा किया।

सभा में उपस्थित खूंटकटी क्षेत्र के आदिवासी.

सरकार समुदायिक जमीन बाहरी लोगों को बेचने के लिए लाई है संपत्ति/प्रोपर्टी कार्ड योजनाः दयामणि बारला

सभा को संबोधित करते हुए झारखंड की आयरन लेडी, दयामणि बारला ने कहा कि, पूर्व में गैरमजरुआ आम और खास जमीन, परती जमीन, और सामुदायिक जमीन को रघुवर सरकार लैंड बैंक में शामिल कर चुकी है। सरकार का मक्सद ये है कि पूंजीपतियों को यहां आमंत्रित करने के दौरान ये दिखा सके की सरकार के पास काफी मात्रा में जमीन है, जिसका उपयोग वे कर सकते हैं। वर्तमान में संपत्ति/ प्रोपर्टी कार्ड बना कर भू-स्वामियों के पास सिर्फ उसी जमीन का मालिकाना हक् रहने दिया जाएगा, जितने जमीन का भू-स्वामी लगान दे रहे हैं, या रशीद कटवा रहे हैं। बाकि वे सभी जमीन जिसका उपयोग ग्रामीण सामुहिक रुप से अपने पूर्वजों के समय से करते चले आ रहे हैं, जिसका लगान सरकार को नहीं दिया जाता है, उन सभी जमीनों पर सरकार का कब्जा हो जाएगा और सरकार उसे बेच सकेगी। ऐसा होने से पांचवी अनुसूचित क्षेत्र में बाहरी लोगों का आगमण होगा, जिससे यहां के आदिवासियों की परंपरा, संस्कृति, जल-जंगल और जमीन खतरे में पड़ जाएगी। इसलिए हम सभी को इस संपत्ति/प्रोपर्टी कार्ड योजना को किसी भी हाल में लागू नहीं होने देना है। इसके लिए हम सभी को संगठित होकर लड़ाई लड़नी होगी, जिस तरह भगवान बिरसा मुंडा ने जल-जंगल और जमीन की रक्षा के लिए कुर्बानी दी।

सभा में उपस्थित ग्रामप्रधान.

रघुवर दास की तरह हेमंत सरकार भी आदिवासियों को उजाड़ने का काम कर रहा हैः ग्लैडसन डुंगडुंग

सभा को संबोधित करने के दौरान मानवाधिकार कार्यकर्ता, ग्लैडसन डुंगडुंग ने पूर्व की रघुवर सरकार के साथ-साथ वर्तमान हेमंत सोरेन सरकार की भी जम कर खिंचाई की। ग्लैडसन ने कहा कि पूर्व कि रघुवर सरकार की पहचना झारखंड में आदिवासियों को उनके जमीन से बेदखल करने वाली सरकार के रुप में बन चुकी है। रघुवर सरकार के कार्यकाल में सीएनटी एक्ट के साथ छेड़छाड़ किया गया, आदिवासियों की लाखों एकड़ जमीन धोखे से हड़प कर लैंड बैंक बनाया गया, जो आदिवासियों के साथ भाजपा ने अन्याय किया है। वर्तमान हेमंत सोरेन सरकार से आदिवासियों को काफी उम्मीदें थी, इसलिए झामुमो के पक्ष में वोट कर आदिवासियों ने हेमंत सोरेन को सत्ता में आसीन किया, लेकिन अब ये सरकार भी आदिवासियों का खून चुस रही है। हेमंत सरकार यदि चाहे तो संविधान के अनुच्छेद-19 के उप अनुच्छेद 5 और 6 लिखा है कि, आदिवासियों का अस्तित्व अगर खत्म होने की स्थिति में है, तो सरकार ऐसा कानून बना सकती है कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में गैर आदिवासियों का प्रवेश ना हो सके।

एक तरफ पूंजीपति और सरकार दूसरी तरफ अकेले आदिवासीः ग्लैडसन डुंगडुंग

ग्लैडसन डुंगडुंग ने आगे कहा कि इस समय सरकार और पूंजीपती एक तरफ एक साथ कड़े हैं और दुसरी तरफ अकेले आदिवासी। पूंजीपती और सरकार मिल कर आदिवासियों के जल-जंगल और जमीन पर येन-केन-प्रकारेण कब्जा करना चाहती है। अगर ये गठजोड़ अपने मक्सद पर सफल हो गया, तो आदिवासियों का समुल नाश हो जाएगा। क्योंकि जल-जंगल और जमीन के बगैर आदिवासी जल बीन मछली की तरह हो जाएंगे। इसलिए वर्तमान समय में ये जरुरी हो गया है कि सभी आदिवासी अपने अस्तित्व को बचाने के लिए आगे आएं, तभी इस गठजोड़ को उखाड़ फेंका जा सकता है और आदिवासी अपने अस्तित्व को बचा सकते हैं।  

चौकीदार के रहते देश का संपत्ति लेकर लोग विदेश भाग रहे हैः भुनेश्वर केवट, सीपीआई

सीपीआई नेता भुनेश्वर केवट नेसंपत्ति/ प्रोपर्टी कार्ड योजना के बारे में मोदी सरकार को आड़े हांथ लेते हुए कहा कि मोदी सरकार यहां के लोगों से उनका हक् अधीकार छीन कर अपने चहेते पूंजीपतियों को आबाद करने में लगी है। मोदी जी अपने आप को जनता का चौकीदार बताते हैं, लेकिन दूसरी तरफ ये चौकीदार देश की सरकारी संपत्तियों को बेचने का काम कर रही है। इनके रहते अरबों अरब लेकर इनके चहेते विदेश भाग रहे हैं, फिर काहे का चौकीदार? भाकपा नेता ने ये भी कहा की जो पूंजीपती बैंक से कर्ज लेकर अपना व्यवसाय कर रहे हैं, जो आकंठ कर्ज में डुबे हुए हैं, उन्हीं लोगों के हांथों में मोदी जी देश की संपत्ति बेच रहे हैं। ये कैसे हो रहा है? ये मोदी जी को देश की जनता को बताना चाहिए। अनुसूचित क्षेत्रों के लिए विशेष कानून बने हुए हैं। संविधान ने आदिवासियों की अस्तित्व और जल-जंगल जमीन की रक्षा के लिए कई कानूनी अधीकार दिए हैं। फिर किस तरह सरकारें इन कानूनो का उल्लंघन कर रही है? मोदी सरकार झारखंड को सिर्फ लूट का अड्डा समझ रही है। वो कानून पर नही बल्कि पूंजीपतियों के इशारे पर काम कर रहे है, जो जनता को समझते हुए प्रतिकार के लिए आगे आना चाहिए।

आदिवासी-मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच, मुंडारी खूंटकटी परिषद् और आदिवासी एकता मंच की सरकार से मांगः

1)केन्द्र सरकार की नयी स्वामीत्व योजना संपत्ति/प्रोपर्टी कार्ड को रद्द किया जाए।

2)सीएनटी/एसपीटी एक्ट, मुंडारी, खूंटकटी एवं 5वीं अनुसूची के प्रावधानों को कड़ाई से लागू किया जाए।

3)तीनों नये कृषि कानून को रद्द किया जाए।

4)गैर मजरुआ आम, गैर मजरुआ खास और परती जमीन, जिसे लैंड बैंक में शामिल किया गया है, उसे रद्द किया जाए।

5)क्षेत्र के सभी जल स्त्रोतों, नदी-नाला का पानी लिफ्ट एरिगेशन के तहत किसानों के खेतों तक पहुंचाया जाए।

6)ऑनलाईन जमीन के दस्तावेजों के साथ हो रहे छेड़-छाड़ एवं जमीन का हेरा फेरी बंद किया जाए।

7)किसानों का कृषि लोन माफ किया जाए।

8)किसानों के खेतो से गुजरने वाली आस्तांवित भारत माला सड़क योजना को रद्द किया जाए।

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