आधी रात को पीड़ित ग्रामीणों से आधार कार्ड और फोटो लेने पहुंची मुरहू पुलिस, सुबह देने की बात पर ग्रामीणों को धमकाया…

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रिपोर्ट- संजय वर्मा…

रांचीः आखिर वो कौन सी वजह है जो मुरहू पुलिस 12 बजे रात में गहरी निंद में सोए हुए 33 ग्रामीणों का आधार कार्ड और फोटो लेने के लिए मारुंगटोली गांव पहुंचती है। इन 33 ग्रामीणों में 6 बुजूर्ग, दो दिव्यांग और एक मरीज भी शामिल है, जो फिलहाल अस्पताल में भर्ती है। पुलिस की इस कार्रवाई से मारुंगटोली गांव के ग्रामीणों में भय व्याप्त है।

एसपी ने एसडीपीओ को दिया है जांच का आदेशः

दरअसल मुरहू थाना क्षेत्र के गोड़ाटोली पंचायत स्थित मारुंगटोली गांव के इन ग्रामीणों ने मुरहू थानेदार के उपर झुठा मामला दर्ज करवाने का आरोप लगाया है और ग्रामीणों के इस खबर का प्रसारण “ताजा खबर झारखंड” में काफी प्रमुखता के साथ किया था, जिसके बाद जिले के एसपी को भी ट्वीट कर मामले की जानकारी दी गई थी, और एसपी ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए जिले के एसडीपीओ को जांच का आदेश दिया है।

आधार कार्ड और फोटो मांगे जाने का कारन पुछे जाने पर पुलिस ने ग्रामीणों को धमकायाः

जो बुजूर्ग तन कर सीधा खड़े भी नही हो सकतें, उन पर थाना प्रभारी ने शांति भंग करने और लॉक डाउन उल्लंघन का मामला दर्ज करवाया है.

इधर एसपी द्वारा जांच का आदेश दिए जाने के दूसरे ही दिन 31 मई की रात को 12 बजे मुरहू थाना से पुलिस के 8 जवान मारुंगटोली गांव पहुंचते हैं और आरोपी बनाए गए 6 बुजूर्ग, 2 दिव्यांग और अन्य ग्रामीणों से आधार कार्ड और फोटो देने की मांग करते हैं। जब ग्रामीणों द्वारा ये कहा जाता है कि इतनी रात को आधार कार्ड और फोटो लेने क्यों पहुंचे हैं, तो आरोपी बनाए गए ग्रामीणों को धमकी दी जाती है, कि सवाल मत पुछो जो बोल रहे हैं वो करो। मुरहू पुलिस के कड़क रुख से सभी ग्रामीण अपना-अपना आधार कार्ड और फोटो बारी बारी से जवानों को दे देते हैं, लेकिन जवानों द्वारा उन्हें ये नहीं बताया जाता है कि किस कार्य के लिए उनका आधार कार्ड और फोटो लिया गया है।

मारुंगटोली के ग्रामीणों में भय का माहौलः

मुरहू पुलिस द्वारा आधी रात में की गई कार्रवाई के बाद पीड़ित ग्रामीणों के साथ-साथ अन्य ग्रामीणों में भी भय का माहौल व्याप्त हो चुका है। जो पुलिस विभाग के लिए सही नही है, इससे ग्रामीण और पुलिस के बीच दूरी और अधीक बढ़ेंगी। इसलिए खूंटी पुलिस को ग्रामीणों के सवाल का जवाब देना चाहिए कि आधी रात को इस तरह बुजूर्ग और दिव्यांगों को आधार कार्ड और फोटो लेने के नाम पर परेशान करना क्यों जरुरी था?

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