जेपीएल कंपनी में चोरी की घटना मनगढंत और फर्जीः ग्रामसभा, सोगोद

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रिपोर्ट- संजय वर्मा…

कंपनी ने 5 बच्चों पर चोरी का बाईनेम एफआईआर दर्ज करवाया है, वहीं आरोपी बच्चों ने ये स्वीकार किया है कि दिन के उजाले में वे लोग मात्र एक चौकी लेकर आए हैं, जिसे पत्थर खदान के चौकीदार ने भी देखा है, और ये भी सच है कि आरोपी नैनू उरांव का 14 हजार कंपनी पर बकाया है।

रांचीः विगत 8 मई को माईनिंग कंपनी जेपीएल के अधिकारी, प्रदीप कुमार झा ने सोगोद स्थित पत्थर खनन क्षेत्र से लगभग 8 लाख रुपये मुल्य के सामानों की चोरी कर लिए जाने का मामला नामकुम थाना में दर्ज करवाया था। प्रदीप कुमार झा ने अपने एफआईआर में चोरी का आरोप सोगोद गांव के पतराटोरी निवासी, दयाल रुंडा, मसीह रुंडा, सुमित रुंडा, करलुस रुंडा और नैनू रुंडा पर दर्ज करवाया है। इसके अलावा माईनिंग क्षेत्र के आसपास के रास्तों को बंद कर देने का भी आरोप लगाया है।

जेपीएल कंपनी द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद, गांव में हुई ग्रामसभा की बैठकः

थाने में एफआईआर किये जाने की जानकारी मिलने के बाद बुधवार, 13 मई को सोगोद गांव में ग्रामसभा के सदस्यों ने बैठक कर पूरे मामले की पड़ताल की। ग्रामसभा की इस बैठक में आरोपी लड़कों को भी बुलाया गया था। यहां चोरी के मामले में आरोपी बच्चों से पुछताछ की गई। आरोपी बच्चों ने बताया कि, कंपनी अपने खनन क्षेत्र से मोटर, लोहा और तार के चोरी हो जाने की बात कह रही है, लेकिन मैं जब अपने 7 दोस्तों के साथ गांव में बाहरी लोग ना घुस पाए, इस पर नजर रखने के लिए घुम रहा था, तभी हम लोगों ने खनन क्षेत्र के रास्ते से गुजरने के दौरान देखा कि स्टाफ रुम का दरवाजा टुटा हुआ है। फिर सभी 7 दोस्त उस कमरे में गए जहां कुछ सामान बिखरा पड़ा था। मैं अपने दोस्तों के साथ मिल कर एक चौकी अपने घर ले आया, उस दौरान गांव का ही व्यक्ति, जो पत्थर खदान में पहरेदारी का काम करता है, उसने भी मुझे अपने दोस्तों के साथ चौकी लाते हुए देखा था। कंपनी जो 8 लाख रुपये मुल्क के सामानों की चोरी होने की बात कह रही है, वो झुठा आरोप है।

ग्राम सभा की बैठक के बाद सौंपा गया मांग पत्र.

आरोपी नैनू रुंडा का वेतन 14 हजार रुपया जेपीएल कंपनी पर बकाया हैः

आरोपी युवक नैनू रुंडा ने ये भी बताया कि, चौकी मैने गुस्से में उठा कर अपने घर लाया है, क्योंकि 2018 में मैट्रिक की परीक्षा लिखने के बाद मैने दो माह जेपीएल कंपनी के पत्थर खदान में काम किया था, लेकिन दो माह का वेतन 14,000 रुपया अब तक कंपनी ने मुझे नही दिया है। कंपनी के जिस अधिकारी ने मुझे काम पर रखा था, वो बिहार जा चुका है, और अपने बकाया वेतन के लिए मैं लगातर कंपनी के पास दौड़ता रहा हूं।

कोरोना वायरस के भय से हर टोला के रास्तों को किया गया है बंद, कंपनी का आरोप झुठाः ग्रामसभा के सदस्य

बैठक के दौरान ग्राम सभा के सदस्यों ने बताया कि कोरोना वायरस के भय से राजाउलातु पंचायत आने वाले हर टोला के रास्तों को ब्लॉक कर दिया गया है, ताकि बाहरी लोग गांव में प्रवेश ना करे। और गांव के युवा टोली बना कर इसके लिए निगरानी भी कर रहे हैं। सिर्फ एंबुलेंस, खाद्य सामाग्री लेकर आने वाले वाहन और कुछ अनिवार्य कार्य के लिए ही रास्ते को खोला जाता है। इसलिए कंपनी का ये आरोप कि सिर्फ पत्थर खनन क्षेत्र के रास्ते को बंद किया गया है, ये भी झुठा और मनगढ़ंत आरोप है।

फर्जी तरीके से लिज हांसिल कर जेपीएल कर रही है पत्थर खनन, इसलिए कंपनी का विरोध ग्रामीणों द्वारा जारी हैः ग्रामसभा

13 मई को सोगोद गांव में हुई ग्रामसभा की बैठक में आरोपी बच्चों से पुछताछ के बाद ग्रामसभा के सदस्य इस निष्कर्श पर पहुंचे कि खनन लीज का विरोध कर रहे ग्रामीणों को धमकाने के लिए कंपनी ने थाने में मनगढ़ंत और झुठा आरोप दर्ज करवाया है, इसलिए इस मामले में पुलिस को सही तरीके से जांच करने की जरुरत है। इससे संबंधित ज्ञापन भी 13 मई को ग्रामसभा के सदस्यों ने नामकुम थाना प्रभारी को सौंपा गया है।

जेपीएल कंपनी पर दर्ज होना चाहिए श्रम कानून के उल्लंघन का मामलाः आरती कुजूर, जिप सदस्य

ग्रामीणों से मामले की जानकारी लेते हुए जिप सदस्य आरती कुजूर.

मामलें में जिप सदस्य आरती कुजूर ने बताया कि आरोपी बच्चों ने सैंकड़ों ग्रामीणों की उपस्थिति में बताया है, कि चौकी उसने सिर्फ इसलिए उठा कर लाया क्योंकि उसका 14 हजार, दो माह का वेतन कंपनी पर बकाया है। जब उसकी उम्र मात्र 16-17 वर्ष थी तब उसने कंपनी के कर्मचारी के तौर पर दो माह जेपीएल के पत्थर खदान में काम किया था और वेतन नही दिए जाने के कारन उसने नौकरी छोड़ दिया था। अगर वाकई में चोरी की घटना हुई है तो पुलिस सही तरीके से जांच करे, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। वहीं आरती कुजूर ने ये भी कहा कि जेपीएल कंपनी पर भी मामला दर्ज होना चाहिए, क्योंकि पत्थर खदान में नाबालिक बच्चों से खनन कार्य करवाना गैरकानूनी है। कंपनी पर श्रम कानून के उल्लंघन का मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

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