2021 की जनगणना से पूर्व हर हाल में अलग सरना धर्म कोड़ चाहिएः गीताश्री उरांव, पूर्व शिक्षा मंत्री, झारखंड

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रिपोर्ट- ताजा खबर झारखंड ब्यूरो…

रांचीः रविवार को पूर्व शिक्षा मंत्री सह प्रदेश अध्यक्ष, अखील भारतीय आदिवासी विकास परिषद् गीताश्री उरांव के नेतृत्व में झारखंड के विभिन्न सामाजिक-धार्मिक संगठनों की प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेसवार्ता में पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव ने वर्तमान सरकार से मांग की है कि, सरना धर्म कोड की मांग को झारखंड विधान सभा के मॉनसून सत्र में पारित कराकर, भारत सरकार को भेजे, क्योंकि आदिवासी समाज अपनी सरना धर्म की पहचान के लिए काफी लंबे अरसे से लड़ाई लड़ते आ रही हैं। गीताश्री उरांव ने आगे कहा कि पंखराज साहेब, बाबा कार्तिक उरांव ने इसकी परिकल्पना 1960 के दशक में ही कर दी थी, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के गठन के साथ-साथ उसके सुव्यवस्थित संचालन हेतु एक संविधान बनाया। जिसे सन् 1967-68 में निबंधित करा कर पूरे राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासियों को एक सूत्र में बांधने तथा उनके विकास का प्रयास किया। क्योंकि आदिवासी समाज कालांतर में राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न धर्मों को मानने वालों में विभक्त हो गया है । फलतः आदिवासियों के मूल धर्म सरना के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए परिषद् के उप समिति केंद्रीय सरना समिति का प्रावधान किया गया।

गीताश्री उराँव ने समस्त सरना समाज से यह आह्वान किया है कि दिनांक 21/9/2020 को प्रातः 9 बजे से 11बजे, हरमू पुल बाईपास रोड से बिरसा चौक तक विशाल मानव श्रृंखला बनाया जाएगा, जिसमें उपस्थित हो कर सरना कोड की मांग को सफल बनाने की कृपा करें।

राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा के प्रदेश महासचिव रवि तिग्गा एवं  महानगर अध्यक्ष संजय कुजूर ने संयुक्त रुप से कहा कि, बाबा कार्तिक उरांव के अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाते हुए राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा एवं आदिवासी छात्र संघ के तत्वाधान में सरना धर्म कोड की मांग, झारखंड गठन के पूर्व से ही उठाया जाता रहा है, किंतु किसी भी सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, जिसका परिणाम है कि आज तक आदिवासी समाज के मूल धर्म को मानने वाले सरना धर्मावलंबी अपने अस्तित्व व पहचान की लड़ाई लगातार लड़ते आ रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन इत्यादि को धर्म के नाम पर अपनी पहचान प्राप्त हो चुकी है। जबकि उक्त धर्मों के प्रवर्तकों का आगमन प्रकृति संरचना के काफी अंतराल के बाद धरती में हुआ है।

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान उपस्थित विभिन्न सामाजिक-धर्मिक संगठन के प्रतिनिधि.

केन्द्रीय सरना समिति के अध्यक्ष नारायण उराँव ने कहा कि, आदिवासी बहुल झारखंड राज्य में माननीय मुख्यमंत्री से समस्त आदिवासी समाज के सामाजिक संगठन तथा अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद, सरना प्रार्थना सभा, आदिवासी छात्र संघ,  एवं केंद्रीय सरना समिति मांग करती है कि, 2020 के मॉनसून सत्र में सरना धर्म कोड विधानसभा से पारित कर केंद्र सरकार को भेजें, ताकि आदिवासियों को धार्मिक पहचान प्रदान करने का मार्ग प्रशस्त हो सके। वर्तमान में यह प्रतीत हो रहा है कि आगामी 2021 की जनगणना प्रपत्र में “अन्य” के कॉलम को हटाने की साजिश केंद्र सरकार द्वारा की जा रही है। जबकि 2011 की जनगणना में अन्य कॉलम में पूरे देश भर से लगभग 50 लाख आदिवासियों ने सरना धर्म अंकित कराया था।

प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद् की रांची जिला अध्यक्ष कुन्दरसी मुंडा,  महानगर अध्यक्ष पवन तिर्की, नोवेल कच्छप, प्रकाश मुंडा, केंद्रीय समिति से  महासचिव अजीत भुटकुमार, तानसेन गाड़ी,   सुखराम पाहन, राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा से पंकज भगत, वीर बुधु भगत हुही मोर्चा से प्रदीप तिर्की,पंकज टोप्पो एवं अन्य लोग शामिल थें।

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